Indian News : मुंबई | महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक सनसनीखेज ठगी का मामला सामने आया है। यहां 72 वर्षीय शेयर बाजार व्यापारी से 58 करोड़ रुपये लूट लिए गए, जब कुछ ठगों ने खुद को ईडी और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” कर लिया। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।
ठगों ने किया ‘डिजिटल अरेस्ट’, 18 खातों से उड़ाए करोड़ों
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने व्यापारी को कॉल कर बताया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में फंसे हुए हैं। उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” की प्रक्रिया में रखा गया और वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। इस दौरान, ठगों ने व्यापारी और उनकी पत्नी से जुड़े 18 बैंक खातों से 58 करोड़ रुपये उड़ा लिए। जब व्यापारी को शक हुआ, तब तक पूरी रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर हो चुकी थी।
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ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर दिया धोखा
आरोपियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों — एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) — का अधिकारी बताकर व्यापारी को डराया। उन्होंने कहा कि उनके नाम से कई फर्जी बैंक ट्रांजेक्शन हुए हैं और अगर वे सहयोग नहीं करेंगे तो गिरफ्तारी हो सकती है। इस झांसे में आकर व्यापारी ने ठगों को अपने वित्तीय दस्तावेज और बैंक डिटेल्स साझा कर दिए।
मुंबई पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह के अन्य सदस्य देश के बाहर से ऑपरेट कर रहे थे। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से इसकी कड़ी जुड़ी होने की आशंका जताई है। इस मामले में कई डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच के लिए साइबर सेल को लगाया गया है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नए तरीके से बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मामला “डिजिटल अरेस्ट” नामक नई ठगी तकनीक का उदाहरण है, जिसमें साइबर अपराधी लोगों को यह यकीन दिलाते हैं कि वे जांच एजेंसियों के निगरानी में हैं। डर के माहौल में लोग अपनी निजी जानकारी और बैंक डिटेल साझा कर देते हैं। पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी अज्ञात कॉल पर बैंक या सरकारी डिटेल साझा न करने की सलाह दी है।
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वरिष्ठ नागरिकों को बनाते हैं आसान निशाना
मुंबई पुलिस के अनुसार, इस तरह के मामलों में वरिष्ठ नागरिक और उच्च आय वर्ग के लोग साइबर ठगों के मुख्य निशाने पर होते हैं। अधिकारी ने बताया कि “डिजिटल अरेस्ट” का यह फॉर्मूला देशभर में तेजी से फैल रहा है और ऐसे मामलों में अब तक करोड़ों की ठगी हो चुकी है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली कॉल या ईमेल की तुरंत पुष्टि करें।
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