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दिनांक 19/01/2023 को किया गया। यह कार्यक्रम हिन्दी] अंग्रेजी और संस्कृत विभाग द्वारा संयुक्त रूप से प्राचार्य . श्रीमती अल्का मेश्राम के अनुमति से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डा. रबिन्दर छाबड़ा ने किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रद्धेय आयु. रूमी (बी. डी. के जापान) एवं अध्यक्षता भदन्त डा. चंद्र कीर्ति सम्राट अशोक सुरभारती विश्वविद्यालय- मेरठ और विश्ष्टि अतिथि दिलीप वासनीकर आयुक्त विभागीय जाँच अधिकारी छत्तीसगढ़ शासन के आतिथ्य में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
डा. मेरली राय ने INTERNATIONAL AND INDIAN LANGUAGES ASSOCIATION के उद्देश्यों के बारें में विस्तार से जानकारी दी। पश्चात् हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. कैलाश शर्मा ने भाषा की उत्पत्ति के बारे में जानकारी देते हुए कहा – ‘‘सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है। इसके बाद क्रमशः पाली] प्राकृत भाषा समय के साथ आती गई। यह देश काल के अनुसार परिवर्तन होती रहती है’’ इत्यादि जानकारी दी।
दिलीप वासनीकर आयुक्त विभागीय जाँच अधिकारी छत्तीसगढ़ शासन के प्रयास से महाविद्यालय में पाली भाषा का शुभारंभ हुआ। वासनीकर ने पाली भाषा एवं बुद्ध की उपदेशों के महत्व के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रद्धेय आयु. रूमी (बी. डी. के जापान) ने पाली भाषा के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा – ‘‘ भगवान बुद्धा के द्वारा पाली भाषा मे दिये गए उपदेशो को भारत के महान सम्राट अशोक के द्वारा विश्व के अनेक देशों में प्रचार-प्रसार किये। यह बौद्ध धर्म मध्यम मार्गीय पर जोर देता है।’’ इत्यादि जानकारी विस्तार से दी।
कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे भदन्त डा. चंद्र कीर्ति सम्राट अशोक सुर भारती विश्वविद्यालय – मेरठ ने पाली भाषा के महत्व व भगवान बुद्ध के उपदेशों के बारे में जानकारी दी साथ ही महाविद्यालय में पाली भाषा के अध्ययन में सहयोग करने का आश्वासन देते हुए विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री महेश कुमार अलेन्द्र ने समस्त अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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