Indian News : बिलासपुर । बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रतनलाल डांगी ने अपने फेसबुक पेज़ पर विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए सन्देश लिखा है। जिसमे उन्होंने लिखा है कि…“जैसी संगत, वैसी रंगत”… हम बचपन से ही पढ़ते और सुनते आ रहे हैं कि एक बार एक सेब बेचने वाला एक पेटी सेब लेकर आया उसने एक सेब गंदा था। जब उसने 2 दिन के बाद पेटी खोली तो देखता है कि सारे सेव खराब हो चुके थे। जिस तरह एक खराब सेब से सारे ही सेब खराब हो गए इसी प्रकार एक भी गलत व्यक्ति की संगति करने से सही व्यक्ति भी गलत दिशा की ओर अग्रसर हो जाता है। संगति का प्रभाव तो अवश्य ही पड़ता है तो क्यों न अच्छी संगति में बैठे। अच्छे आचरण वाले व्यक्तियों की संगति से हम अवश्य ही अच्छे गुण ग्रहण करेंगे, जो जीवन भर हमारे साथ रहेंगे, समय-समय पर हमारे काम आएंगे। अच्छे गुणों, अच्छे संस्कारों ,अच्छे मित्रों से ही जीवन को सही दिशा मिलती है। यह सब हमारे हाथ में है कि हम स्वयं को किस दिशा में लेकर जाते हैं ।

हम सभी चाहते हैं कि हमारा वर्तमान और भविष्य सुंदर और सुखद हो और हम यह भी मानते हैं कि मानव सहज ही वैसा हो जाता है जैसा वातावरण का उस पर प्रभाव होता है । इसीलिए हमें अच्छे बुरे की पहचान होना आवश्यक है। यदि हम चाहते हैं कि समाज में हमें सम्मान की दृष्टि से देखा जाए, हर कोई हमारे से मिलना चाहे, तो हमें स्वयं को इस के योग्य बनाना होगा और यह तभी संभव होगा जब हमारी संगति सही होगी। यदि अच्छे लोगों के पास बैठेंगे तो कुछ न कुछ सीखने को ही मिलेगा और यदि हम कुसंगति में पड़ जाए तो विनाश अनिवार्य है। धीरे-धीरे हमारे अंदर ऐसे अवगुण आ जाएंगे जिनके कारण हम खुद से और दूसरों से दूर होते चले जाएंगे और जीवन में एक ऐसा अकेलापन आ जाएगा जिसे हम चाह कर भी दूर नहीं कर पाएंगे।

मानव एक सामाजिक प्राणी है और समाज के बिना नहीं रह सकता, मानव नहीं बन सकता इससे यह सिद्ध होता है कि यदि व्यक्ति सुधर जाए तो समाज सुधर सकता है । यह तभी हो सकता है जब हम गुमराह करने वालों का संग छोड़ उन लोगों से मेल मिलाप बढ़ाएं जो हमेशा ही दिशा में ले जाएं क्योंकि हमें विकास चाहिए विनाश नहीं। संग का रंग तो चढ़ते चढ़ते चढ़ ही जाता है। एक बार एक व्यक्ति का पर्स गुम हो गया जिसमें उसका बहुत सा धन था। वह उसकी रिपोर्ट लिखवाने पुलिस थाने पहुंचा वहीं पर वह व्यक्ति भी मौजूद था जिसे उसका पर्स मिला था। वह व्यक्ति जिसके पास पर्स था वह उसे लौटाने के लिए ही वहां पहुंचा था। जिसका पर्स गुम हुआ था यह देखकर वह बहुत प्रसन्न हुआ दूसरे व्यक्ति की ईमानदारी पर कि आज भी अच्छे लोग इस संसार में है।

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