Indian News : कांकेर । जिले के सरहद पर लगे नारायपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोंगे के आश्रित ग्राम बीनागुंडा में प्राथमिक शाला है। गांव के स्कूल में पदस्थ शिक्षक तीन साल हो गए स्कूल आते ही नहीं। शिक्षक यहां केवल पुस्तक पहुंचवा देते हैं और मध्यान्ह भोजन का सामान ग्रामीणों के साथ भेज देते हैं। शिक्षक जैनूराम के रवैये को देखते ग्रामीणों ने अपने स्तर पर गांव के ही एक पांचवी शिक्षित युवक मैनू नूरूटी को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा है जो अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

जिस शिक्षक को सरकार यहां के बच्चों को पढ़ाने वेतन देती है वह बच्चों को पढ़ाने आते ही नहीं। इसलिए ग्रामीण गांव के युवक को पढ़ाने के लिए आपस में चंदा कर प्रतिमाह 2500 रूपए देते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि एक ही युवा के जिम्मे पांच कक्षाएं होने से परेशानी होती है।

इस स्कूल के नाम से वेतन लेने वाला शिक्षक तीन सालों से स्कूल से गायब है। बच्चों को पढ़ाने वाले गांव के युवा 28 साव मैनू नूरूटी ने कहा कभी-कभी मैं जब निजी काम में होता हूं तो पांचवी क्लास के कुछ होनहार छात्रों को जूनियर क्लास के बच्चों को पढ़ाने कह देता हूं। पहले चौथी और पांचवी क्लास के छात्रों को एक साथ पढ़ाते हैं। उसके बाद पहली से तीसरी क्लास के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाते हैं।

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