Indian News : उत्तर प्रदेश | अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य अब पूरी तरह पूरा हो चुका है। रामलला के भव्य मंदिर के चारों ओर परकोटे में छह छोटे मंदिर बनाए गए हैं। परिसर में जटायू और गिलहरी की मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या पहुंचकर मंदिर परिसर में ध्वज फहराएंगे और अंतिम औपचारिक कार्यों का शुभारंभ करेंगे।

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राममंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूरा, सौंदर्यकरण जारी

तीन मंज़िला राममंदिर का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण से गुजर चुका है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, गर्भगृह, मुख्य द्वार और शिल्पकला की फिनिशिंग पूरी कर ली गई है। मंदिर परिसर का सौंदर्यकरण, लाइटिंग और सुरक्षा से जुड़ा काम भी तेज़ी से चल रहा है ताकि 25 नवंबर तक सब तैयार हो जाए।

परकोटे में बने छह मंदिर, रामायण पात्रों को समर्पित

मंदिर के चारों ओर बने परकोटे में छह छोटे मंदिर तैयार किए गए हैं, जो रामायण के प्रमुख पात्रों को समर्पित हैं। इन मंदिरों में हनुमान, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और गणेश भगवान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। प्रत्येक मंदिर में बारीक पत्थर की नक्काशी और पारंपरिक स्थापत्य शैली का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।

जटायू और गिलहरी की मूर्तियों से सजी परिसर की थीम

राममंदिर परिसर में दो विशेष मूर्तियाँ श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही हैं — एक जटायू की, जो रामायण में सीता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ था, और दूसरी गिलहरी की, जो सेतु निर्माण में सहयोग का प्रतीक मानी जाती है। ट्रस्ट का कहना है कि ये मूर्तियाँ ‘सेवा और समर्पण’ की भावना को दर्शाती हैं।

पीएम मोदी करेंगे ध्वज फहराने का कार्य, भव्य आयोजन की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे। वे मंदिर परिसर में ‘ध्वज आरोहण’ करेंगे और निर्माण पूर्ण होने की औपचारिक घोषणा करेंगे। इस मौके पर देशभर से संत, धार्मिक नेता और श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने अयोध्या में विशेष व्यवस्था की है और शहर को दीपोत्सव जैसी रोशनी से सजाया जा रहा है।

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जनवरी 2026 में संभवतः पूरी तरह खुल जाएगा राममंदिर परिसर

रामलला के दर्शन के लिए वर्तमान में सीमित क्षेत्र खुला है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि जनवरी 2026 तक मंदिर का पूरा परिसर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। इससे पहले 25 नवंबर का कार्यक्रम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

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