Indian News : नई दिल्ली | भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 72 वर्ष के हो गए। पीएम मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वड़नगर (Vadnagar) में हुआ था. उनका पूरा नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी है. पीएम मोदी का नाम देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के शीर्ष नेताओं में शुमार है. उनके जन्मदिन पर लोगों की बधाई देने का सिलसिला जारी है. देश-दुनिया के तमाम नेता उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) में चीतों को 70 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से बसाने के लिए छोड़ेंगे. ये चीते नामीबिया से भारत लाए गए हैं.

:साल 1952 में विलुप्त हो चुके चीतों से एक बार फिर हिन्दुस्तान की धरती आबाद होगी. इनका ठिकाना मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल वन पार्क में होगा. अपने ठिकाने पर पहुंचने के लिए नामीबिया से आठ चीते विशेष मालवाहक विमान से उड़कर आज तड़के ग्वालियर के महाराजा एयरपोर्ट पर उतर गए.

यहां से ये सभी चीते सेना के विशेष हेलीकॉप्टर चिनूक से एक बार फिर उड़ान भरेंगे और इन्हें कूनो राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा. जहां ये कुछ दिन तक विशेष बाड़े में रहेंगे. वहीं जब यहां की हवा पानी और माहौल के अभ्यस्त हो जाएंगे, तो इन्हें पूरा जंगल सौंप दिया जाएगा. पीएम मोदी 10:45 बजे लीवर खींचकर चीतों को रिलीज करेंगे.

चीतों को सुरक्षा देंगे विदेशी डॉग्स

 भारतीय विमान से सभी चीतों को नामीबिया से लाया जा रहा है. इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद छोड़ेंगे, ऐसे में इन चीतों की सिक्योरिटी के लिए विदेशी नस्ल के कुत्ते भी बुलवाए गए हैं. महाराष्ट्र के नासिक से जर्मन, वायमरैनर बुलवाया गया है.वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट किरण रहालकर ने टीवी 9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि इस तरह के डॉग्स को खासतौर पर जानवरों को खोजने के लिए तैयार किया जाता है.

वन्य जीव के आवास को पुनर्जीवित करने की कोशिश

कुनो नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री द्वारा चीतों की रिहाई भारत के वन्य जीवन और इसके आवास को पुनर्जीवित करने और विविधता लाने की उनकी कोशिशों का एक हिस्सा है. चीता को 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था. जिन चीतों को प्रधानमंत्री रिलीज करेंगे, वे नामीबिया से एक एमओयू के तहत लाए गए हैं. चीता भारत में खुले जंगल और घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में मदद करेगा.

आठ चीतों में 5 मादा हैं

नामीबिया से लाए गए 8 चीतों में मादा चीतों की संख्या 5 है, इन पांचों चीतों की उम्र दो से पांच साल के बीच है. जबकि इनके कुनबे में बढोत्तरी के लिए इनके साथ 3 नर चीते भी हैं और इनकी उम्र साढ़े चार से साढ़े पांच साल के बीच है. इन सभी चीतों को शुक्रवार की रात नामीबिया की राजधानी विंडहोक से विशेष मालवाहक विमान बोइंग 747-400 से ग्वालियर हवाई अड्डे के लिए रवाना किया गया था.

छत्तीसगढ़ में था देश का अंतिम चीता, 1947 में मौत

आजादी से पूर्व तक देश में चीतों की आबादी छत्तीसगढ़ में थी. यहां कोरिया जिले में अंतिम चीते की मौत 1947 में हो गई थी. इसके बाद 1952 में चीतों को भारत की धरती से विलुप्त घोषित कर दिया गया. भारती की धरती को एक बार फिर चीतों से आबाद करने के लिए वर्ष 2009 में अफ्रीकन चीता इंट्रोडक्शन प्रोजेक्ट इन इंडिया शुरू किया गया था. इसी प्रोजेक्ट के तहत नामीबिया से आठ चीतों का आयात किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page