Indian News : गया | मौसम की बेरुखी ऊपर से खाद की किल्लत किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. समय से मानसून ना आने के कारण धान की फसल बर्बाद होने की कगार पर है. वही हल्की फुल्की बारिश के बाद किसानों ने अपनी धान की फसल में खाद डालने के लिए बेचैन है. खाद की किल्लत और कालाबजारी के कारण किसानों का पारा चढ़ा हुआ है. ताजा मामला जहानाबाद जिला मुख्यालय विस्कोमान भवन में देखने को मिला. जहां खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लगी है.

प्राकृतिक की मार झेल रहे किसान


बिस्कोमान भवन पर किसानों की भीड़ से विधि व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न हो रही है. खाद लेने आये किसानो ने बताया कि पहले प्राकृतिक की मार झेल रहे किसानों के सामने अब यूरिया, डीएपी खाद की किल्लत सामने आ गयी है. खाद लेने के लिए सुबह से लाइन में खड़े है लेकिन अभी तक नही मिल पाई है. कुछ किसानों ने बताया कि सुबह सात बजे जब लाइन में लगने के लिए पहुंचे तो काफी लोग पहले से ही लाइन में लगे हुए थे. पूरे दिन लाइन में लगने के बाद भी खाद नहीं मिली.

खाद को लेकर बाजारों में हो रही कालाबजारी


बता दें किसानों का आरोप है कि किसी को दस बोर खाद की जरूरत है तो उसे तीन बोरा ही दिया जाता है. किसी को एक बोरा जरूरत है तो वह अपने चार पांच सहयोगियों को लाइन में खड़ा कर दस दस बोरा खाद उठा रहा है.  बाजार में कालाबजारी हो रही है. सरकार को इस पर अंकुश लगाना चाहिए. आधार कार्ड के वजय जमीन के राशिद देखर देना चाहिए था ताकि जिसको जितना जरूरत हो उतना मिल सके. 

क्या कहते है अनुमंडल कृषि पदाधिकारी


इस मामले पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने बताया कि खाद की कोई किल्लत नही है. मार्केट में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है. 78 हजार यूरिया खाद का बैग आया. सभी किसानों को एक लिमिट अनुसार वितरण किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से जिले में बारिश नही हुआ था, लेकिन रविवार से रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद धान की रोपाई शुरू हुई है. जिसके कारण कुछ लोग खाद को स्टॉक करना चाह रहे है. मगर डेली मॉनिटरिंग की जा रही है. खाद को लेकर किसानों को कोई दिक्कत नही होगी.

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