Indian News : बिहार | बिहार में हालिया जनादेश के बाद राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है। आरजेडी की नेता रोहिणी आचार्य ने अपने परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने का ऐलान करते हुए कहा है कि उन्हें अपने करीबी सहयोगी संजय यादव और रमीज़ ने ऐसा करने को कहा था। इस बयान पर महाराष्ट्र से सांसद सुप्रिया सुले ने प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने इस कदम की निंदा करते हुए कहा है कि यह भारतीय परिवार व संस्कृति की परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
Read More>>>>Uttar Pradesh : लखनऊ में कैंसर पीड़ित के इलाज के लिए रूस से उम्मीद
सुप्रिया सुले का प्रतिक्रिया — पारिवारिक रिश्तों की महत्ता
सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि उन्होंने रोहिणी आचार्य के दावे के बारे में “कुछ न सुना है, न देखा है।” उन्होंने लालू-राबड़ी परिवार में लंबे समय से चल रहे संबंधों की ओर इशारा करते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती — ये सभी संसद में उनके साथ रहते आए हैं। सुले का कहना है कि उनका परिवार और राजनैतिक जुड़ाव वर्षों से रहे हैं, और इस इतिहास को देखते हुए वे रोहिणी के हाल के बयानों पर शक करती हैं।
Read More>>>बाबा बागेश्वर के साथ सड़क पर बैठकर CM मोहन ने खाया खाना
रिश्तों को “परिवार जैसे” बताया — 30 सालों की नज़दीकी
सुले ने यह भी कहा कि उनके और रोहिणी के परिवार के बीच करीब 30 सालों का रिश्ता है, जिसे वे “परिवार जैसे” नाते के रूप में देखती हैं। इस तरह की लंबे समय की नज़दीकी उनके लिए सिर्फ राजनैतिक गठबंधन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव की भी मिसाल रही है। इसलिए वे इस तीव्र बयानबाज़ी को सिर्फ एक राजनीतिक चाल के रूप में देखती हैं, न कि वास्तविक पारिवारिक टूटन के रूप में।
भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर तर्क
सुले ने अपने बयान में यह जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में परिवार की अहमियत बहुत बड़ी होती है। उनका कहना है कि किसी भी तरह की मानसिक या भावनात्मक दरार को सार्वजनिक रूप से ऐसे तरीके से व्यक्त करना, जैसा रोहिणी ने किया है, “संस्कृति के अनुरूप” नहीं लगता। वह यह भी कहती हैं कि सम्मान और पारस्परिक विश्वास परिवार की नींव होते हैं, और ये अचानक टूट नहीं सकते बिना गहराई से सोचे समझे।
Indian News के WhatsApp Channel से जुड़े
क्या यह राजनैतिक चाल है?
सुप्रिया सुले के तर्कों में यह संकेत भी है कि रोहिणी का बयान केवल राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश हो सकती है। चुनाव के बाद ऐसा अचानक पारिवारिक त्याग न केवल व्यक्तिगत दर्द का इजहार है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता पर असर डालने की एक योजना भी हो सकती है। सुले का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक तूफान का मकसद भावनात्मक सहानुभूति जुटाना और राजनीतिक छवि को दोबारा आकार देना हो सकता है।
@indiannewsmpcg
Indian News
7415984153

