Indian News: जमैका | जमैका में आए विनाशकारी तूफान ‘मेलिसा’ (Hurricane Melissa) ने तबाही मचा दी है। अब तक 45 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 15 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारी राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन कई इलाकों से अब भी संपर्क टूटा हुआ है। यह तूफान कैटेगरी 5 का था, जिसने पश्चिमी जमैका को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
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दो कस्बों से अब तक नहीं हो पाया संपर्क : जमैका के आपातकालीन प्रबंधन कार्यालय (ODPEM) के महानिदेशक एल्विन गेल ने बताया कि 28 अक्टूबर को आए इस तूफान के बाद दो कस्बे अब तक मुख्य सड़क नेटवर्क से कटे हुए हैं। वहां तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री भेजी जा रही है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाके पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।
30 हजार परिवार हुए विस्थापित : अधिकारियों के मुताबिक तूफान के कारण करीब 30,000 परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। इनमें से 1100 लोग अभी भी 88 अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। सरकार ने प्रभावित इलाकों में अस्थायी कैंप और मेडिकल यूनिट स्थापित किए हैं, ताकि विस्थापित लोगों को भोजन, पानी और दवाइयों की सुविधा मिल सके।
सड़कें अब भी मलबे में दबीं : एल्विन गेल ने बताया कि अभी भी करीब तीन दर्जन सड़कें पूरी तरह बंद हैं। मलबा हटाने और बिजली बहाल करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राहत दलों को कई जगह पैदल पहुंचना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है।
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धीरे-धीरे बहाल हो रही सुविधाएं : अधिकारियों ने बताया कि अब तक 70% से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा बहाल कर दी गई है, जबकि 50% उपभोक्ताओं के मोबाइल नेटवर्क फिर से चालू हो गए हैं। वहीं, 60% उपभोक्ताओं के लिए बिजली आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है। सरकार ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में सभी बुनियादी सेवाएं बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है।
राहत कार्यों में जुटी टीमें : राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत और पुनर्वास कार्यों में जुटे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी मदद मांगी गई है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और जरूरत पड़ने पर सहायता भेजने का आश्वासन दिया है।
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