Indian News : रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित सिद्धिशिखर विजय उत्सव के अवसर पर जैन समाज द्वारा किए गए तपस्वियों के सम्मान समारोह में भाग लिया। इस आयोजन में 114 तपस्वियों ने 44 दिन तक 4500 तरह के व्रत रखकर जैन परंपरा के अनुसार कठोर साधना की, जिन्हें मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

जैन समाज की तपस्या और समर्पण: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में जैन समाज की तपस्या की सराहना की और कहा कि इस तपस्या से छत्तीसगढ़ में खुशहाली और सुख-समृद्धि आएगी। उन्होंने जैन समाज के तपस्वियों की 44 दिन की कठोर साधना और 4500 प्रकार के व्रतों की अनूठी परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तपस्या के माध्यम से प्रदेश में शांति और समृद्धि का वातावरण बनेगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का योगदान: कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने संतों और गुरुजनों के आशीर्वाद का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को संतों का आशीर्वाद हमेशा प्राप्त होता रहा है और उनके प्रेरणादायक मार्गदर्शन से यह आध्यात्मिक तपस्या संभव हो पाई। डॉ. सिंह ने प्रभु राम के ननिहाल को शांति का टापू बताते हुए, यहां की खुशहाली की कामना की।




रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का संदेश: रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने जैन तपस्वियों को बधाई दी और कहा कि उनकी तपस्या से छत्तीसगढ़ की धर्मभूमि और कर्मभूमि समृद्धिशाली बनेगी। उन्होंने सभी संतों के प्रवचनों को जीवन में आत्मसात करने की सलाह दी और तपस्वियों की मेहनत की सराहना की।

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धर्म और तपस्या के महत्व पर उद्बोधन:पूज्य जयपाल विजयजी महाराज ने अपने उद्बोधन में जैन धर्म के अहिंसा और करूणा पर जोर दिया। उन्होंने उपभोक्तावाद को हिंसा मानते हुए, तपस्वियों की तपस्या को विश्व और राष्ट्र के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने तपस्वियों की कठिन तपस्या की सराहना की और इसे सिद्धिशिखर पर विजय के समान बताया।

अतिथियों की उपस्थिति और कार्यक्रम का आयोजन:इस कार्यक्रम में विधायक श्री राजेश मूणत, श्री गजराज पगारिया, श्री स्वरूप चंद जैन, पूज्य प्रियदर्शी विजय जी महाराज और पूज्य तीर्थ प्रेम विजय जी महाराज भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक समाज एवं चर्तुमास समिति द्वारा किया गया था, जिसमें सकल जैन समाज के पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल हुए।

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